मानव की चिंतन शक्ति प्रकित का मानव को सबसे बड़ा वरदान है. इसे मानवता के विकाश के लिए सही दिशा में बनाये रखना मानव का सबसे बड़ा कर्तब्य एवं इस धरती को उसके द्वारा दिया गया सबसे बड़ा दान होगा. हर मानव जन का कर्तब्य है की वह प्रकित से जितना कुछ लेता है , कम से कम कुछ तो प्रकित पर उपकार करे और प्रकित की सुन्दरता बनाये रखने एवं वातावरण को सुध्ध बनाये रखने में नही कुछ तो आंशिक सहयोग तो कर ही सकता है. जिससे यह धरती हमारे आने वाले पीढियों के लिए भी उसी प्यार से अपना स्नेह लुटा सके, जिस तरह यह धरती माता हमें अपना स्नेह देती है....
यह धरती कितना देती है...
क्या कभी हमने ये सोचा...
मानों तो यह धरती माता है,
न मानों तो सिर्फ़ यह मुठी भर माटी....
है विशाल कितना सागर जो...
कितनो को शरण है देता,
पर यह धरती माँ न होती
तो विशाल सागर कहा पे होता...
खोजते है हम हम मुठी भर पानी
वो भी मंगल पर जाकर,
पर घर के बाहर कभी न साफ करते,
जिसपर चलते इठलाकर...
है इतनी उदार माता यह ,जो
बिन मागे सब देती
कभी न करती शिकवा कोई
भले ही आहे भरती,
पर माँ की आह बहुत कठोर है,
जो तुम दिल से जान जाओगे ,
भटकोगे धरती धरती पर
अपनी धरती माँ को न पाओगे....