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hi re kavita
hi re kavita कविता से कविता के चक्कर मे,
कविता छूट गयी,
लेखनी छूटी, रोजी छूटी,
किस्मत रूठ गयी,
घर बार टूटा, दिल भी टूटा,
खुद का भी ठिकाना गया ,
जब नशा उतरा , उसके इस्क का,
अपना ही आशियाना गया,
हाय् रे कविता , कैसी तू कविता,
अब तो कवि बस यही है रमता,
भारी पड़ गयी कविता की ममता.
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